Month: दिसम्बर 2020

भगवती जगदंबा की कृपा से लक्ष्मीपुत्र एकवीर और राजकुमारी एकावली के विवाह की कथा

पूर्वकाल में हरीवर्मा नाम के एक राजा रहते थे । हरिवर्मा ने  भगवान विष्णु के जैसे पुत्र प्राप्ति के लिए 100 वर्षों तक घोर तपस्या की थी । तब भगवान विष्णु  और देवी लक्ष्मीने अश्व का रूप धारण करके एक… Read More ›

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के पुत्र एकवीर की कथा

एक समय की बात है, भगवान विष्णु ने अपने प्राणों से भी प्रिय पत्नी लक्ष्मी जी को, घोड़ी होने का शाप दे दिया था । इसी कारणवश, लक्ष्मी जी घोड़ी बनकर कर यमुना और तमसा नदी के , संगम स्थान… Read More ›

लक्ष्मी जी का घोड़ी के रूप में महादेव की तपस्या करने की कथा

एक समय की बात है भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी को घोड़ी होने का शाप दे दिया । भगवान विष्णु की प्रत्येक लीला में रहस्य होता है । अपने हर कार्य का कारण वे अच्छी तरह से जानते हैं ।… Read More ›

देवी जगदंबा के अंश से उत्पन्न बालकद्वारा भृगुवंशी ब्राह्मणों की रक्षा की कथा

भृगुवंशी ब्राह्मण क्षत्रियों के यजमान थे । हैहयवंश में कार्तवीर्य  नाम के एक महान राजा हुए । भगवान दत्तात्रेय द्वारा कार्तवीर्य ने देवी जगदंबा के मंत्र की दीक्षा ली थी ।  भगवती जगदंबा राजा कार्तवीर्य की इष्टदेव थी । राजा… Read More ›

जानिए क्यों हैहयवंशी क्षत्रियों ने भृगुवंशी ब्राह्मणों का संहार किया था

  भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी के एक पुत्र थे । जिनका नाम हैहय था, यह एकवीर के नामसे भी जाने जाते थे । इन्हीं हैहय के नाम से, उनके कुल में उत्पन्न क्षत्रियों को हैहयवंशी कहा जाता है ।… Read More ›

वशिष्टजी का मैत्रावारुणि नाम क्यों पड़ा

महर्षि वशिष्ठ राजा निमि के कुल गुरु थे । एक समय की बात है राजा निमि ने एक राजसी यज्ञ करने का संकल्प लिया । इस यज्ञ की अवधि 5 वर्ष की थी ।  राजा ने इस यज्ञ के लिए… Read More ›

वशिष्ट जी का राजा निमि को शाप और भगवती जगदम्बा द्वारा राजा को वरदान

 बहुत पहले की बात है निमि नाम के एक राजा रहते थे , जो बड़े ही धर्मात्मा थे । निमि ने एक समय,  राजसि यज्ञ करने का संकल्प लिया । आवश्यक समस्त वस्तुओं का उन्होंने संग्रह कर लिया , यज्ञ… Read More ›

जानिए क्यों अगस्त्यमुनि ने इंद्र पद पर नियुक्त नहुष को सर्प होने का शाप दिया था

बहुत पहले की बात है, इंद्र ने त्वष्ठा के पुत्र वृत्रासुर की हत्या कर दी थी । उस समय वृत्रासुर स्वर्ग का राजा था और भगवान विष्णु के सलाह अनुसार इंद्र वृत्रासुर से मित्रता करके रह रहे थे । एक… Read More ›

जानिए इंद्र ने कैसे ब्रह्मा हत्या के पाप से मुक्ति पाई थी

देवराज इंद्र ने ,स्वर्ग खोने के भय है त्वष्टा के पुत्र त्रिशिरा का अपने वज्र से वध कर दिया था । अपने पुत्र की मृत्यु का बदला लेने के लिए, त्वष्ठा ने एक दूसरे पुत्र वृत्रासुर को उत्पन्न किया था… Read More ›

भगवती जगदंबा की कृपा से शचि को अपने पति इंद्र के दर्शन की कथा

बहुत पहले की बात है वृत्रासुर नाम के  दैत्य ने देवराज इंद्र से  स्वर्ग छीन लिया था ।  देवताओं के  स्वर्ग से  बाहर निकाल कर दिया था । भगवान विष्णु के कहने पर देवताओं ने वृत्रासुर से इंद्र की मित्रता… Read More ›

देवी भुवनेश्वरी की कृपा से इंद्र द्वारा वृत्रासुर के वध की कथा

वृत्रासुर नाम का एक दैत्य था , जिसे प्रजापति त्वष्ठा ने ,इंद्रा से आपने पुत्र त्रिशिरा की मृत्यु का बदला लेने के लिए उत्पन्न किया था । वृत्रासुर ने बृह्मा की तपस्या की और उनसे वरदान पाकर वह अति बलशाली… Read More ›

ब्रह्मके वरदान से वृत्रासुर का इंद्र बनने की कथा

इंद्र ने अपने पद खोने के भय के कारण ,प्रजापति त्वष्ठा के पुत्र त्रिशिरा की हत्या कर दी । तब त्वष्ठा ने इंद्र से बदला लेने के लिए यज्ञ करके वृत्रासुर नाम के एक दूसरे पुत्र को उत्पन्न किया ।… Read More ›

वृत्रासुर द्वारा इंद्रकी पराजय की कथा

त्वष्ठा प्रजापति का त्रिशिरा नाम का एक पुत्र था ,जिसे इंद्र ने तपस्या करते समय पद खोने के भय से ,दुखी होकर अपने वज्र से मार डाला था । अपने पुत्र की इस हत्या का बदला लेने के लिए ,… Read More ›

वृत्रासुर के जन्म की कथा

एक समय की बात है त्वष्ठा प्रजापति के पद पर नियुक्त थे ।  महान तपस्वी त्वष्ठा को देवताओं में प्रधान माना जाता था । वे बड़े ही कार्यकुशल और ब्राह्मण प्रेमी थे । इंद्रा के साथ कुछ वैमनास्थ होजाने के… Read More ›

देवी भुवनेश्वरी की कृपा से वेदव्यास द्वारा पांडवों को दिवंगत परिजनों को दिखाने की कहानी

कुरुक्षेत्र के यद्ध के बाद युधिष्टिर हस्तिनापुर के राजा बन गए । धृतराष्ट्रने अठारह वर्षोतक वहीं रहकर अपना कष्टमय जीवन व्यतीत किया । एक दिन धृतराष्ट्र ने अपना शेष जिवन वन में बिताने का निर्णय लिया और अपने इस निर्णय… Read More ›