बहुत पहले की बात है, इंद्र ने त्वष्ठा के पुत्र वृत्रासुर की हत्या कर दी थी । उस समय वृत्रासुर स्वर्ग का राजा था और भगवान विष्णु के सलाह अनुसार इंद्र वृत्रासुर से मित्रता करके रह रहे थे । एक… Read More ›
devi bhagwat puran
जानिए इंद्र ने कैसे ब्रह्मा हत्या के पाप से मुक्ति पाई थी
देवराज इंद्र ने ,स्वर्ग खोने के भय है त्वष्टा के पुत्र त्रिशिरा का अपने वज्र से वध कर दिया था । अपने पुत्र की मृत्यु का बदला लेने के लिए, त्वष्ठा ने एक दूसरे पुत्र वृत्रासुर को उत्पन्न किया था… Read More ›
भगवती जगदंबा की कृपा से शचि को अपने पति इंद्र के दर्शन की कथा
बहुत पहले की बात है वृत्रासुर नाम के दैत्य ने देवराज इंद्र से स्वर्ग छीन लिया था । देवताओं के स्वर्ग से बाहर निकाल कर दिया था । भगवान विष्णु के कहने पर देवताओं ने वृत्रासुर से इंद्र की मित्रता… Read More ›
देवी भुवनेश्वरी की कृपा से इंद्र द्वारा वृत्रासुर के वध की कथा
वृत्रासुर नाम का एक दैत्य था , जिसे प्रजापति त्वष्ठा ने ,इंद्रा से आपने पुत्र त्रिशिरा की मृत्यु का बदला लेने के लिए उत्पन्न किया था । वृत्रासुर ने बृह्मा की तपस्या की और उनसे वरदान पाकर वह अति बलशाली… Read More ›
ब्रह्मके वरदान से वृत्रासुर का इंद्र बनने की कथा
इंद्र ने अपने पद खोने के भय के कारण ,प्रजापति त्वष्ठा के पुत्र त्रिशिरा की हत्या कर दी । तब त्वष्ठा ने इंद्र से बदला लेने के लिए यज्ञ करके वृत्रासुर नाम के एक दूसरे पुत्र को उत्पन्न किया ।… Read More ›
वृत्रासुर द्वारा इंद्रकी पराजय की कथा
त्वष्ठा प्रजापति का त्रिशिरा नाम का एक पुत्र था ,जिसे इंद्र ने तपस्या करते समय पद खोने के भय से ,दुखी होकर अपने वज्र से मार डाला था । अपने पुत्र की इस हत्या का बदला लेने के लिए ,… Read More ›
वृत्रासुर के जन्म की कथा
एक समय की बात है त्वष्ठा प्रजापति के पद पर नियुक्त थे । महान तपस्वी त्वष्ठा को देवताओं में प्रधान माना जाता था । वे बड़े ही कार्यकुशल और ब्राह्मण प्रेमी थे । इंद्रा के साथ कुछ वैमनास्थ होजाने के… Read More ›
देवी भुवनेश्वरी की कृपा से वेदव्यास द्वारा पांडवों को दिवंगत परिजनों को दिखाने की कहानी
कुरुक्षेत्र के यद्ध के बाद युधिष्टिर हस्तिनापुर के राजा बन गए । धृतराष्ट्रने अठारह वर्षोतक वहीं रहकर अपना कष्टमय जीवन व्यतीत किया । एक दिन धृतराष्ट्र ने अपना शेष जिवन वन में बिताने का निर्णय लिया और अपने इस निर्णय… Read More ›
क्यों होना पड़ा था सर्पों को जनमेजय के यज्ञ में भस्म और क्यों कि थी आस्तिक मुनि ने उस यज्ञ में सर्पों की रक्षा
कश्यप मुनि की दो पत्नियां थी कद्रू और विनीता । कद्रू सर्पोंकी माता थी और विनीता गरुड़ की । एक समय की बात है भगवान सूर्य के रथ में जोते हुए अश्व को देखकर कद्रू ने मैं विनीत से कहा… Read More ›
जानिए कैसे रुरुमुनि द्वारा मुक्ति मिली थी शाप से अजगर बने ब्राह्मण को
पूर्वकाल मे रुरु नाम के एक मुनि थे जिनका जन्म भृगु वंशी प्रमति की पत्नी प्रतापी के गर्भ से हुआ था । रुरुमुनि का विवाह स्थूलकेशी नाम के एक मुनि की पुत्री प्रमद्वारा से तय हुआ था । प्रमद्वारा नाम… Read More ›
आधी आयु देकर रुरु मुनि द्वारा मरी हुई अपनी भावी पत्नी को जीवित करने की कथा
भृगु के कुल में प्रमती नाम के एक पुरुष उत्पन्न हुए थे प्रमति की पत्नी का नाम प्रतापी था । प्रतापी के गर्भ से रुरुमुनि का जन्म हुआ था जो महान तेजस्वी थे । उसी समय की बात है स्थूलकेशी… Read More ›
सूरथ नाम के राजा और समाधि नाम के वैश्य पर देवी की कृपा की कथा
बहुत पहले की बात है सूरथ नाम के एक राजा थे जो प्रजा का अपने पुत्रों की तरह पालन करते थे । एक समय सूरत राजा की दुश्मनी कोला विध्वंसी नाम के क्षत्रियों से हो गई । युद्ध में सेना… Read More ›
सत्यव्रत नाम के ब्राह्मण का देवी के मंत्र के प्रभाव से विद्वान होने की कथा
कोसल देश में देवदत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था । संतान नहीं होने के कारण वह ब्राह्मण अति दुखी था । संतान प्राप्ति के उद्देश्य से देवदत्त ने पुत्रेष्टि यज्ञ करने का निर्णय किया और नदी के तट पर… Read More ›
राजा पुरुरवा और उर्वशी का विवाह
विवस्वान मनु के पुत्र श्राद्धदेव थे , श्राद्धदेव की पत्नी का नाम श्रद्धा था । श्राद्धदेव और श्रद्धा के पुत्र सुधुम्र थे । एक बार सुधुम्र महादेव से शापित वन में चले गए । इस वन को महादेव ने शाप… Read More ›
सुधुम्र राजा को देवी की कृपा से परमधाम की प्राप्ति की कथा
सुधुम्र नाम के एक राजा थे । जो बड़े ही धर्मात्मा थे इनके मुख से कभी भी असत्य वाणी नहीं निकलती थी । एक दिन राजा एक घोड़े पर सवार होकर जंगल में चले गए , उनके साथ उनके कई… Read More ›