विवस्वान मनु के पुत्र श्राद्धदेव थे , श्राद्धदेव की पत्नी का नाम श्रद्धा था । श्राद्धदेव और श्रद्धा के पुत्र सुधुम्र थे । एक बार सुधुम्र महादेव से शापित वन में चले गए । इस वन को महादेव ने शाप… Read More ›
devi bhagwat
सुधुम्र राजा को देवी की कृपा से परमधाम की प्राप्ति की कथा
सुधुम्र नाम के एक राजा थे । जो बड़े ही धर्मात्मा थे इनके मुख से कभी भी असत्य वाणी नहीं निकलती थी । एक दिन राजा एक घोड़े पर सवार होकर जंगल में चले गए , उनके साथ उनके कई… Read More ›
पुरुरवाकी उत्पत्ति की कथा
मेरुगिरि के निचले भाग में एक अति सुंदर वन है । इस वन में कई प्रकार के बड़े-बड़े वृक्ष है और कई प्रकार के फल और पुष्प देने वाले बहोत से वृक्ष है । ऐसे वृक्षों और लताओं से भरे… Read More ›
व्यासपुत्र – शुकदेव जी के जन्म की कथा
एक समय की बात है महर्षि वेदव्यास सरस्वती तट पर स्थित अपने आश्रम पर रहते थे । उनके आश्रम पर दो गौरैया पक्षी रहते थे उन्हें देखकर महर्षि वेदव्यास को बड़ा आश्चर्य हुआ । उन्होंने देखा कि यह पक्षी अभी-अभी… Read More ›
श्रीमद देवीभागवत की प्राकट्य की कथा
सरस्वती नदी के तट पर स्थित अपने आश्रम पर महर्षि वेदव्यास अपने पुत्र शुकदेव जी को विवाह करने के लिए को मना रहे थे । गृहस्थ आश्रम के प्रति उनकी निरसक्ति और इसके कष्टदाई होने की बातों को सुनकर और… Read More ›
शुकदेवजी के गृहत्याग की कथा
शुकदेव जी महर्षि वेद व्यास के औरस पुत्र थे । इनका जन्म महर्षि वेद व्यास के वीर्य का घृताची नाम की स्वर्ग की अप्सरा को देख लकडीपर गिरने से हुआ था । उस वक़्त ओ अप्सरा वेदव्यास जी से डर… Read More ›
भगवान विष्णु जी का सर क्यों काट गया था
एक समय की बात है भगवान विष्णु दैत्यों के साथ 10000 वर्ष तक युद्ध करके थक गए थे । तब वे अपने वैकुंठ धाम में गए और वहां उन्होंने अपने धनुष को जमीन पर रख दिया और पद्मासन लगाकर योग… Read More ›
महर्षि वेदव्यास जी की पुत्र प्राप्ति की इच्छा
एक समय की बात है महर्षि वेदव्यास सरस्वती नदी के तट पर ,अपने आश्रम पर थे । उनके आश्रम पर दो गौरैया पक्षी रहते थे । उन्हें देखकर वे बड़े आश्चर्यचकित हो गए । उन्होंने देखा कि अभी अभी अंडे… Read More ›
देवी भागवत महात्मय – राजा दुर्दम और उनकी पत्नी रेवती के पुत्र रैवत का मन्वंतर के स्वामी होने की कथा
रुत्वाक मुनी बड़े ही विलक्षण बुद्धि वाले थे । रेवती का चौथा चरण गण्डान्त होता है । इस काल में जन्म लेने के कारण उनका पुत्र अति दुराचारी बन गया और इस कारणवश रुत्वाक मुनि को बहुत ही दुख और… Read More ›
देवी भागवत श्रवण का महात्मय – रुत्वाक मुनि के दुख निवारण की कथा
रुत्वाक नाम के एक विलक्षण बुद्धि वाले मुनि थे । समय आने पर उनके घर पुत्रोत्सव हुआ । रेवती का चौथा चरण गण्डान्त होता है ; उसीमे उस बालक की उत्पत्ति हुई थी । मुनिने उस लड़के के जातकर्म आदि… Read More ›