पुरुरवाकी उत्पत्ति की कथा

 मेरुगिरि के निचले भाग में एक अति सुंदर वन है । इस वन में कई प्रकार के बड़े-बड़े वृक्ष है और कई प्रकार के फल और पुष्प देने वाले बहोत से वृक्ष है । ऐसे वृक्षों और लताओं से भरे हुए उस वन में भवरे सदा गुनगुनाते थे । हंस और बागुल विचरते थे ।  निरंतर बासों की ध्वनि होती रहती थी । भीतर में जाने वालों को यह वन अति सुख दायक प्रतीत होता था ।

 एक समय की बात है,  भगवान शिव अपनी पत्नी पार्वती के साथ इस वन में क्रीड़ा कर रहे थे । तभी सनक आदि अनेक मुनि भगवान शंकर के दर्शन पाने के लिए इस वन में आए और देखा भगवान शंकर अपनी पत्नी पार्वती जी के साथ क्रीड़ा कर रहे हैं । मुनियों को आते देख  पार्वती जी  वहां से दूर खड़ी हो गई और मुनि गण, शंकर और पार्वती जी को क्रीड़ा करते देख वहां से चले गए । मुनियों के जाने के बाद भगवान शंकर ने पार्वती जी से कहा देवी तुम इतनी क्यों लजा रही हो मैं अभी तुम्हें सुखी कर देता हूं । इस वन को मैं शॉप देता हूं कि जो भी पुरुष इस वन में आएगा वह स्त्री बन जाएगा । इस बात को जानने वाले लोग कभी उस वन के भीतर  नहीं जाते थे ।

सुधुम्र  नाम के एक राजा थे , जो बड़े ही धर्मात्मा थे । एक दिन वे शिकार खेलने के बहाने घोड़े पर चढ़कर जंगल में गए और इस कामवन को  देखकर उन्हें उस वन में जाने की इच्छा हुई । इस बात को नहीं जानते थे कि यह वन भगवान शंकर से शापित है और उस वन के भीतर चले गए । इस वन में जाते ही वह स्त्री में परिवर्तित हो गए और उनका घोड़ा भी घोड़ी के रूप में बदल गया । यह राजा स्त्री बने हुए इस राजा का नाम इला पड़ गया और वन के बाहर आकर चिंता में डूब कर इधर-उधर घूमने लगे ।

इला पर चंद्रमा के पुत्र बुध की दृष्टि पड़ी और उन्होंने इन्हें अपनी पत्नी बनाने की कामना इला के सामने प्रस्तुत की । तब इला को भी यह बात जच गई और उन्होंने बुध को अपना पति बना लिया तब तो प्रेम पूर्वक इन दोनों का संबंध हो गया । कुछ दिनों बाद इला ने एक पुत्र को उत्पन्न किया इसी पुत्र का नाम बुध और इलाने पुरुरवा रखा । पुरुरवा की उत्पत्ति के बाद इला अपने गुरुदेव के पास जाकर भगवान शंकर के आशीर्वाद से एक माह तक पुरुष रहती थी और बाद में एक माह तक स्त्री बनी रहती थी । पश्चात उन्होंने भगवती जगदंबा की आराधना करके पूर्ण रूप से पुरुष बनकर उन्हीं के जगदंबा के धाम को चले गए थे ।

इस प्रकार सुधुम्र के स्त्री रूप  इला से और चंद्र पुत्र बुध से राजा पुरुरवा की उत्पत्ति हुई थी । जिन्होंने आगे जाकर उर्वशी से विवाह किया था और उर्वशी से बिछड़ने के बाद अति दुखी हुए थे । 



Categories: दुर्गा देवी की कथाएँ

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