भागवत पुराण

कृष्णा भाग २ – कंस के अंत की आकाशवाणी

  प्राचीन समयकी बात है ,यमुनाके मनोहर तटपर मधुवन नामका एक वन था। वहाँ लवणासुर नामसे विख्यात एक प्रतापी दानव रहता था। उसके पिताका नाम मधु था। वरके प्रभावसे लवणासुरके अभिमानकी सीमा नहीं थी। उस दुष्टसे सभी जीव कष्ट पा… Read More ›

भाग १ – देवी पृथ्वी के असहनीय दुख और भगवान् द्वारा अवतार ग्रहण का वचन

  द्वापर युग की बात है,लाखों दैत्यों ने राजाओं का वेश धारण करके इस पृथ्वी पर जन्म लिया था । कंस,पूतना,चाणूर, कालयवन, जरासंध, तृणावर्त, कागासुर, अघासुर, प्रलंबासुर, नरकासुर, शकटासुर, वत्सासुर,बकासुर,अरिष्टासुर,धेनुकासुर, कालिया ,व्योमासुर, कैवल्यपीड, बाणासुर, पौंड्रक, शिशुपाल,दंतवक्र ये सारे दैत्य इन… Read More ›

भगवानके विराट स्वरूप का वर्णन

पूर्ण पुरुष भगवान श्रीकृष्ण सृष्टि के आदि मध्य और अंत है । भगवान  निर्गुण और सगुण भी है । यही भगवान सर्वव्यापी, अंतर्यामी और सर्वशक्तिमान है । जब राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषिने तक्षक नाग के द्वारा मृत्यु का श्राप… Read More ›

जानिए क्या किया था राजा परीक्षित ने श्रृंगी ऋषि से शाप मिलने के बाद

भगवान श्रीकृष्ण के अवतार समाप्ति के बाद पृथ्वीपर कलियुग आरम्भ हो गया । जब कलियुग ने अभिमन्यु पुत्र परीक्षित के राज्य में प्रवेश किया तब परीक्षित कलियुग को मारने के लिए तैयार होगये । राजा को हाथमे तलवार लिए देख… Read More ›

राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषिके शाप की कथा

 द्वापर युग के अंत में भगवान श्री कृष्ण ने पृथ्वी पर अवतार धारण करके अधर्मी राजाओं के भार से पृथ्वी को मुक्त किया था  । जब भगवान श्रीकृष्ण  अपना अवतार कार्य समाप्त करके अपने धाम को चले गए तब पंडवोने… Read More ›

महाराज परीक्षितद्वारा कलीयुगका दमन

पांडवों के शरीर त्यागने के बाद अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित राजा हुए । परीक्षित बहुत ही धर्मात्मा और प्रजास्नेही थे । वे सदा ही ब्राह्मणो की सलाह के अनुसार राज्य का कार्यभार चलाते । एक समय उनको सूचना मिली कि… Read More ›

परीक्षितकी दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वीका संवाद

पांडवोंके अपने जीवन का त्याग करने के बाद उनके वंशज महाराज परीक्षित हस्तिनापुर साम्राज्य का शासन करने लगे । ब्राह्मणों की शिक्षा और सलाह के अनुसार परीक्षित अपना राज्य चलाया करते थे । उनके जन्म के समय ज्योतिषियों ने उनके… Read More ›

देवर्षी नारद के पूर्व जन्म की कथा ।

एक दिन की बात है महर्षि वेदव्यास प्रातःकाल उठकर स्नान आदि करके सरस्वती नदी के तट पर स्थित अपने आश्रम पर बैठे थे । उनोहनें महाभारत और देवताओं के पराक्रम और लीलाओं से पूर्ण अनेक पुराणों का निर्माण किया था… Read More ›

भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों का वर्णन

भगवान को जब सृष्टि करने की इच्छा उत्पन्न हुई तो उन्होंने अपने पुरुष रूप को प्रकट किया और कारण जल में शयन किया । उनके उसे  पुरुष रूप के नाभि से एक कमल उत्पन्न हुआ जिस में ब्रह्मा जी का… Read More ›

श्रीमदभागवत श्रवण के प्रभावसे भक्ति,ज्ञान,वोराग्य का बूढ़े से युवा हो जाना

देवर्षी नारद भगवान के परम भक्तों में से एक है । वे सदा भ्रमण करते रहते है । एक समय की बात है नारदजी को सनकादि मुनि मिल गए । सनकादि ऋषियों ने नारदजी से पूछा , नारद तुम इतने… Read More ›

श्रीमद्भागवत श्रवण के प्रभाव से धुंधुकारी को पिशाच शरीर से मुक्ति की कथा

कलियुग के प्रारंभ में , आत्मदेव और धुंधुलि नाम के पति पत्नी तुंगभद्रा नदी के तट पर स्तिथ एक नगर में वास करते थे । आत्मदेव के पास संपत्ति और सुख सुविधा की कोई कमी नही थी । आत्मदेव वेदों… Read More ›

आत्मदेव के पुत्र धुंधुकारी और गोकर्ण के जन्म की कथा

पूर्व समय की बात है तुंगभद्रा नदी के तटपर एक सुंदर नगर बसा था, उस नगर में  सारे वर्णों के अनेक लोग  अपने – अपने  वर्ण अनुसार कर्म में लगे रहते थे । उसी नगर में आत्मदेव नाम के एक… Read More ›