भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजीके साथ वृन्दावनमें रहकर अनेकों प्रकारकी लीलाएँ कर रहे थे। उन्होंने एक दिन देखा कि वहाँके सब गोप इन्द्र-यज्ञ करनेकी तैयारी कर रहे हैं । भगवान् श्रीकृष्ण सबके अन्तर्यामी और सर्वज्ञ हैं। उनसे कोई बात छिपी नहीं थी,… Read More ›
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कृष्ण भाग २७ – प्रलम्बासुर उद्धार
अब आनन्दित स्वजन सम्बन्धियोंसे घिरे हुए एवं उनके मुखसे अपनी कीर्तिका गान सुनते हुए श्रीकृष्णने गोकुलमण्डित गोष्ठमें प्रवेश किया । इस प्रकार अपनी योगमायासे ग्वालका-सा वेष बनाकर राम और श्याम व्रजमें क्रीडा कर रहे थे। उन दिनों ग्रीष्म ऋतु थी।… Read More ›
कृष्ण भाग ५ – कंसद्वारा देवकी और वासुदेव के छः पुत्रों की हत्या
पहले पुत्र के जन्म के बाद वसुदेवजी ने आकाशवाणी के समय दिए हुए वचन अनुसार उनके पुत्र को लेकर कंस की महल की और चल पड़े । मार्गमें जाते समय जनताने उनकी बड़ाई आरम्भ कर दी। दर्शकोंने कहा, भाइयो!… Read More ›
कृष्ण भाग ४ -वसुदेव और देवकी के पहले पुत्र का जन्म और वासुदेव द्वारा बालक को कंस को देने जाना
कंस के कोप से देवकी को बचाकर वसुदेवजी अपने घर चले आये । देवकी बड़ी सती-साध्वी थी। सारे देवता उसके शरीरमें निवास करते थे। देवी स्वरूपा देवकी वसुदेवजीके साथ मर्यादाके अनुसार रहने लगीं। उपयुक्त समय आनेपर उन्हें गर्भ रह गया।… Read More ›
कृष्ण भाग ३ – वसुदेवजीकी बुद्धिमत्तासे देवकीकी कंसकी तलवारसे रक्षा
कंस बड़ा पापी था। उसकी दुष्टताकी सीमा नहीं थी। वह भोजवंशका कलंक ही था। आकाशवाणी सुनते ही उसने तलवार खींच ली और अपनी बहिनकी चोटी पकड़कर उसे मारनेके लिये तैयार हो गया था। वह अत्यन्त क्रूर तो था ही, पाप-कर्म… Read More ›
कृष्णा भाग २ – कंस के अंत की आकाशवाणी
प्राचीन समयकी बात है ,यमुनाके मनोहर तटपर मधुवन नामका एक वन था। वहाँ लवणासुर नामसे विख्यात एक प्रतापी दानव रहता था। उसके पिताका नाम मधु था। वरके प्रभावसे लवणासुरके अभिमानकी सीमा नहीं थी। उस दुष्टसे सभी जीव कष्ट पा… Read More ›
देवर्षी नारद के पूर्व जन्म की कथा ।
एक दिन की बात है महर्षि वेदव्यास प्रातःकाल उठकर स्नान आदि करके सरस्वती नदी के तट पर स्थित अपने आश्रम पर बैठे थे । उनोहनें महाभारत और देवताओं के पराक्रम और लीलाओं से पूर्ण अनेक पुराणों का निर्माण किया था… Read More ›
श्रीमदभागवत श्रवण के प्रभावसे भक्ति,ज्ञान,वोराग्य का बूढ़े से युवा हो जाना
देवर्षी नारद भगवान के परम भक्तों में से एक है । वे सदा भ्रमण करते रहते है । एक समय की बात है नारदजी को सनकादि मुनि मिल गए । सनकादि ऋषियों ने नारदजी से पूछा , नारद तुम इतने… Read More ›
श्रीमद्भागवत श्रवण के प्रभाव से धुंधुकारी को पिशाच शरीर से मुक्ति की कथा
कलियुग के प्रारंभ में , आत्मदेव और धुंधुलि नाम के पति पत्नी तुंगभद्रा नदी के तट पर स्तिथ एक नगर में वास करते थे । आत्मदेव के पास संपत्ति और सुख सुविधा की कोई कमी नही थी । आत्मदेव वेदों… Read More ›
आत्मदेव के पुत्र धुंधुकारी और गोकर्ण के जन्म की कथा
पूर्व समय की बात है तुंगभद्रा नदी के तटपर एक सुंदर नगर बसा था, उस नगर में सारे वर्णों के अनेक लोग अपने – अपने वर्ण अनुसार कर्म में लगे रहते थे । उसी नगर में आत्मदेव नाम के एक… Read More ›
देवी भक्त राजा पुरंजय की कथा जिसने दैत्यों के साथ युद्ध में देवराज इंद्र को अपना वाहन बनाया था
पूर्व समय की बात है इक्ष्वाकु अयोध्या के राजा थे । राजा इक्ष्वाकु को सूर्यवंश का प्रवर्तक माना जाता है । वंश की वृद्धि के लिए राजा इक्ष्वाकु ने भगवती जगदंबा की बहुत ही कठिन तपस्या की थी । देवर्षि… Read More ›
भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का रेवत की पुत्री रेवती के साथ विवाह की कथा
वैवस्वत मनु के कुल में रेवत नाम के एक राजा हुए । शत्रुओंको परास्त करनेवाले रेवत ने समुद्र के मध्य एक सुंदर नगरी का निर्माण करवाया था । उस नगरी का नाम कुशस्थली था, उसी नगर में रहकर रेवत अपने… Read More ›
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के पुत्र एकवीर की कथा
एक समय की बात है, भगवान विष्णु ने अपने प्राणों से भी प्रिय पत्नी लक्ष्मी जी को, घोड़ी होने का शाप दे दिया था । इसी कारणवश, लक्ष्मी जी घोड़ी बनकर कर यमुना और तमसा नदी के , संगम स्थान… Read More ›
लक्ष्मी जी का घोड़ी के रूप में महादेव की तपस्या करने की कथा
एक समय की बात है भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी को घोड़ी होने का शाप दे दिया । भगवान विष्णु की प्रत्येक लीला में रहस्य होता है । अपने हर कार्य का कारण वे अच्छी तरह से जानते हैं ।… Read More ›
देवीभागवत श्रवण का महात्म्य – श्री कृष्णा के अपयश शांति की कथा
श्रीमद् देवी भागवत का श्रवण भक्ति और मुक्ति देने वाला है । इसके श्रवण मात्र से मनुष्य के सारे दुख दूर हो जाते हैं और उसका जीवन हर्ष , संतोष से भर जाता है । भगवान श्री कृष्ण के पिता… Read More ›