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कृष्ण भाग ११ – कंस का देवकी वासुदेव से क्षमा मांगना और उसके मंत्रियों संग चर्चा
जब देवी योगमाया कंस के हाथ से छूटकर अपने बाल स्वरूप को त्यागकर अष्टभुजा रूप धारणकर कंस को चेतावनी देकर अंतर्धान होगयी तब देवीकी यह बात सुनकर कंसको असीम आश्चर्य हुआ। उसने उसी समय देवकी और वसुदेवको कैदसे छोड़… Read More ›
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कृष्णा भाग १० – कंसके हाथसे छूटकर योगमायाका आकाशमें जाकर भविष्यवाणी करना
जब वसुदेवजी लौट आये, तब नगरके बाहरी और भीतरी सब दरवाजे अपने-आप ही पहलेकी तरह बंद हो गये। इसके बाद नवजात शिशुके रोनेकी ध्वनि सुनकर द्वारपालोंकी नींद टूटी । वे तुरन्त भोजराज कंसके पास गये और देवकीको सन्तान होनेकी बात… Read More ›
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कृष्ण भाग ९ – वसुदेवजी द्वारा कृष्णा को गोकुल लेके जाना और कन्या रूपी योगमाया को लेके आना
मथुरा के कारागृह में पूर्ण परब्रह्म भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर राजाओं के रूप में जन्म लिए हुए राजाओं का अंत करने के लिए अवतार ले लिया था । उसी समय गोकुलमे नन्दपत्नी यशोदाके गर्भसे उस योगमायाका जन्म हुआ,… Read More ›
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कृष्ण भाग ८ – भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य
देवकी के आठवें गर्भ के आठवें महीने में समस्त शुभ गुणोंसे युक्त बहुत सुहावना समय आया। रोहिणी नक्षत्र था। आकाशके सभी नक्षत्र, ग्रह और तारे शान्त,सौम्य हो रहे थे । दिशाएँ स्वच्छ प्रसन्न थीं। निर्मल आकाशमें तारे जगमगा रहे… Read More ›
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कृष्ण भाग ७ – भगवान का गर्भ प्रवेश और देवताओं द्वारा गर्भ स्तुति
कंस एक तो स्वयं बड़ा बली था और दूसरे, मगधनरेश जरासन्धकी उसे बहुत बड़ी सहायता प्राप्त थी। तीसरे, उसके साथी थे-प्रलम्बासुर, बकासुर, चाणूर, तृणावर्त, अघासुर, मुष्टिक, अरिष्टासुर, द्विविद, पूतना, केशी और धेनुक। तथा बाणासुर और भौमासुर आदि बहुत-से दैत्य… Read More ›
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कृष्ण भाग ६ -भगवान शेषनाग का देवकी और वसुदेवजी के सातवें पुत्र के रूप में जन्म
हर एक परिस्थिति में अपने कर्तव्य की जानकारी रखने वाले और विकट से विकट स्थिति में भी पूर्ण निष्ठा के साथ धर्म पालन करने वाले महात्मा वसुदेवजी ने आकाशवाणी के समय दिए हुए वचन अनुसार जन्म लेते ही उनके पुत्रों… Read More ›
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कृष्ण भाग ५ – कंसद्वारा देवकी और वासुदेव के छः पुत्रों की हत्या
पहले पुत्र के जन्म के बाद वसुदेवजी ने आकाशवाणी के समय दिए हुए वचन अनुसार उनके पुत्र को लेकर कंस की महल की और चल पड़े । मार्गमें जाते समय जनताने उनकी बड़ाई आरम्भ कर दी। दर्शकोंने कहा, भाइयो!… Read More ›
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कृष्ण भाग ४ -वसुदेव और देवकी के पहले पुत्र का जन्म और वासुदेव द्वारा बालक को कंस को देने जाना
कंस के कोप से देवकी को बचाकर वसुदेवजी अपने घर चले आये । देवकी बड़ी सती-साध्वी थी। सारे देवता उसके शरीरमें निवास करते थे। देवी स्वरूपा देवकी वसुदेवजीके साथ मर्यादाके अनुसार रहने लगीं। उपयुक्त समय आनेपर उन्हें गर्भ रह गया।… Read More ›
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कृष्ण भाग ३ – वसुदेवजीकी बुद्धिमत्तासे देवकीकी कंसकी तलवारसे रक्षा
कंस बड़ा पापी था। उसकी दुष्टताकी सीमा नहीं थी। वह भोजवंशका कलंक ही था। आकाशवाणी सुनते ही उसने तलवार खींच ली और अपनी बहिनकी चोटी पकड़कर उसे मारनेके लिये तैयार हो गया था। वह अत्यन्त क्रूर तो था ही, पाप-कर्म… Read More ›
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कृष्णा भाग २ – कंस के अंत की आकाशवाणी
प्राचीन समयकी बात है ,यमुनाके मनोहर तटपर मधुवन नामका एक वन था। वहाँ लवणासुर नामसे विख्यात एक प्रतापी दानव रहता था। उसके पिताका नाम मधु था। वरके प्रभावसे लवणासुरके अभिमानकी सीमा नहीं थी। उस दुष्टसे सभी जीव कष्ट पा… Read More ›
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भाग १ – देवी पृथ्वी के असहनीय दुख और भगवान् द्वारा अवतार ग्रहण का वचन
द्वापर युग की बात है,लाखों दैत्यों ने राजाओं का वेश धारण करके इस पृथ्वी पर जन्म लिया था । कंस,पूतना,चाणूर, कालयवन, जरासंध, तृणावर्त, कागासुर, अघासुर, प्रलंबासुर, नरकासुर, शकटासुर, वत्सासुर,बकासुर,अरिष्टासुर,धेनुकासुर, कालिया ,व्योमासुर, कैवल्यपीड, बाणासुर, पौंड्रक, शिशुपाल,दंतवक्र ये सारे दैत्य इन… Read More ›
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भगवती जगदम्बा के सिद्धपीठों के नाम
पूर्व समय की बात है दक्षप्रजापति ने भगवती जगदम्बा की आराधना करके उनको अपनि पुत्री के रूप में पाया था । दक्षने देवीके इस अवतार का नाम सती रख दिया, आगे चलकर दक्षने अपनी पुत्री सती का विवाह भगवान शिव… Read More ›
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जानिए क्यों दक्षके मन में उत्पन्न हुआ था शिव और सती के प्रति द्वेष
पूर्व समय की बात है सृष्टि में हलाहल नाम के देत्य उत्पन्न हुए थे । ब्रह्माजी के वरदान से यह दैत्य बहुत ही अभिमानी हो गए थे । समस्त त्रिलोकी को जीतकर इन दैत्यों ने विष्णु लोक और शिव लोके… Read More ›
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भगवानके विराट स्वरूप का वर्णन
पूर्ण पुरुष भगवान श्रीकृष्ण सृष्टि के आदि मध्य और अंत है । भगवान निर्गुण और सगुण भी है । यही भगवान सर्वव्यापी, अंतर्यामी और सर्वशक्तिमान है । जब राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषिने तक्षक नाग के द्वारा मृत्यु का श्राप… Read More ›
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जानिए क्यों चली गई थी लक्ष्मी और गौरी भगवान विष्णु और शिव को छोड़ के
आदिशक्ति भगवती जगदम्बा ने इस समस्त संसार की रचना की है । इन भगवती को ही सर्वेश्वरी , सर्वशक्तिस्वरूप, सर्वस्थिता और सर्वज्ञा कहा गया है । जब इन देवी को सृष्टि करने की इच्छा होती है तब यह देवी स्वयं… Read More ›