वृन्दावन

कृष्ण भाग 33 – इन्द्रयज्ञ निवारण

भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजीके साथ वृन्दावनमें रहकर अनेकों प्रकारकी लीलाएँ कर रहे थे। उन्होंने एक दिन देखा कि वहाँके सब गोप इन्द्र-यज्ञ करनेकी तैयारी कर रहे हैं । भगवान् श्रीकृष्ण सबके अन्तर्यामी और सर्वज्ञ हैं। उनसे कोई बात छिपी नहीं थी,… Read More ›

कृष्ण भाग 32 – यज्ञपत्नियोंपर कृपा

एक दिन भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजी और ग्वालबालोंके साथ गौएँ चराते हुए वृन्दावनसे बहुत दूर निकल गये । ग्रीष्म ऋतु थी। सूर्यकी किरणें बहुत ही प्रखर हो रही थीं । परन्तु घने घने वृक्ष भगवान् श्रीकृष्णके ऊपर छत्तेका काम कर रहे… Read More ›

कृष्ण भाग 31 – गोपियों द्वारा देवी कात्यायनी से प्रार्थना – गोपी वस्त्र हरण लीला

अब हेमन्त ऋतु आयी। उसके पहले ही महीनेमें अर्थात् मार्गशीर्षमें नन्दबाबाके व्रजकी कुमारियाँ कात्यायनी देवीकी पूजा और व्रत करने लगीं। वे केवल हविष्यान्न ही खाती थीं ⁠।⁠ वे कुमारी कन्याएँ पूर्व दिशाका क्षितिज लाल होते-होते यमुनाजलमें स्नान कर लेतीं और… Read More ›

कृष्ण भाग 30 – गोपियाँ कृष्ण की बांसुरी का गुणगान करती हैं – वेणु गीत

शरद् ऋतुके कारण वह वन बड़ा सुन्दर हो रहा था। जल निर्मल था और जलाशयोंमें खिले हुए कमलोंकी सुगन्धसे सनकर वायु मन्द-मन्द चल रही थी। भगवान् श्रीकृष्णने गौओं और ग्वालबालोंके साथ उस वनमें प्रवेश किया ⁠। सुन्दर-सुन्दर पुष्पोंसे परिपूर्ण हरी-हरी… Read More ›

कृष्ण भाग 29 – वर्षा और शरद्‌ऋतुका वर्णन

ग्रीष्म ऋतु के  बाद,  वर्षा ऋतुका शुभागमन हुआ। इस ऋतुमें सभी प्रकारके प्राणियोंकी बढ़ती हो जाती है। उस समय सूर्य और चन्द्रमापर बार-बार प्रकाशमय मण्डल बैठने लगे। बादल, वायु, चमक, कड़क आदिसे आकाश क्षुब्ध-सा दीखने लगा ⁠।⁠ आकाशमें नीले और… Read More ›