भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजीके साथ वृन्दावनमें रहकर अनेकों प्रकारकी लीलाएँ कर रहे थे। उन्होंने एक दिन देखा कि वहाँके सब गोप इन्द्र-यज्ञ करनेकी तैयारी कर रहे हैं । भगवान् श्रीकृष्ण सबके अन्तर्यामी और सर्वज्ञ हैं। उनसे कोई बात छिपी नहीं थी,… Read More ›
बलराम
कृष्ण भाग 32 – यज्ञपत्नियोंपर कृपा
एक दिन भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजी और ग्वालबालोंके साथ गौएँ चराते हुए वृन्दावनसे बहुत दूर निकल गये । ग्रीष्म ऋतु थी। सूर्यकी किरणें बहुत ही प्रखर हो रही थीं । परन्तु घने घने वृक्ष भगवान् श्रीकृष्णके ऊपर छत्तेका काम कर रहे… Read More ›
कृष्ण भाग 29 – वर्षा और शरद्ऋतुका वर्णन
ग्रीष्म ऋतु के बाद, वर्षा ऋतुका शुभागमन हुआ। इस ऋतुमें सभी प्रकारके प्राणियोंकी बढ़ती हो जाती है। उस समय सूर्य और चन्द्रमापर बार-बार प्रकाशमय मण्डल बैठने लगे। बादल, वायु, चमक, कड़क आदिसे आकाश क्षुब्ध-सा दीखने लगा । आकाशमें नीले और… Read More ›
कृष्ण भाग २७ – प्रलम्बासुर उद्धार
अब आनन्दित स्वजन सम्बन्धियोंसे घिरे हुए एवं उनके मुखसे अपनी कीर्तिका गान सुनते हुए श्रीकृष्णने गोकुलमण्डित गोष्ठमें प्रवेश किया । इस प्रकार अपनी योगमायासे ग्वालका-सा वेष बनाकर राम और श्याम व्रजमें क्रीडा कर रहे थे। उन दिनों ग्रीष्म ऋतु थी।… Read More ›
कृष्ण भाग ६ -भगवान शेषनाग का देवकी और वसुदेवजी के सातवें पुत्र के रूप में जन्म
हर एक परिस्थिति में अपने कर्तव्य की जानकारी रखने वाले और विकट से विकट स्थिति में भी पूर्ण निष्ठा के साथ धर्म पालन करने वाले महात्मा वसुदेवजी ने आकाशवाणी के समय दिए हुए वचन अनुसार जन्म लेते ही उनके पुत्रों… Read More ›