भागवत पुराण

कृष्ण भाग ३ – वसुदेवजीकी बुद्धिमत्तासे देवकीकी कंसकी तलवारसे रक्षा

कंस बड़ा पापी था। उसकी दुष्टताकी सीमा नहीं थी। वह भोजवंशका कलंक ही था। आकाशवाणी सुनते ही उसने तलवार खींच ली और अपनी बहिनकी चोटी पकड़कर उसे मारनेके लिये तैयार हो गया था। वह अत्यन्त क्रूर तो था ही, पाप-कर्म… Read More ›

कृष्णा भाग २ – कंस के अंत की आकाशवाणी

  प्राचीन समयकी बात है ,यमुनाके मनोहर तटपर मधुवन नामका एक वन था। वहाँ लवणासुर नामसे विख्यात एक प्रतापी दानव रहता था। उसके पिताका नाम मधु था। वरके प्रभावसे लवणासुरके अभिमानकी सीमा नहीं थी। उस दुष्टसे सभी जीव कष्ट पा… Read More ›

भाग १ – देवी पृथ्वी के असहनीय दुख और भगवान् द्वारा अवतार ग्रहण का वचन

  द्वापर युग की बात है,लाखों दैत्यों ने राजाओं का वेश धारण करके इस पृथ्वी पर जन्म लिया था । कंस,पूतना,चाणूर, कालयवन, जरासंध, तृणावर्त, कागासुर, अघासुर, प्रलंबासुर, नरकासुर, शकटासुर, वत्सासुर,बकासुर,अरिष्टासुर,धेनुकासुर, कालिया ,व्योमासुर, कैवल्यपीड, बाणासुर, पौंड्रक, शिशुपाल,दंतवक्र ये सारे दैत्य इन… Read More ›

भगवानके विराट स्वरूप का वर्णन

पूर्ण पुरुष भगवान श्रीकृष्ण सृष्टि के आदि मध्य और अंत है । भगवान  निर्गुण और सगुण भी है । यही भगवान सर्वव्यापी, अंतर्यामी और सर्वशक्तिमान है । जब राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषिने तक्षक नाग के द्वारा मृत्यु का श्राप… Read More ›

जानिए क्या किया था राजा परीक्षित ने श्रृंगी ऋषि से शाप मिलने के बाद

भगवान श्रीकृष्ण के अवतार समाप्ति के बाद पृथ्वीपर कलियुग आरम्भ हो गया । जब कलियुग ने अभिमन्यु पुत्र परीक्षित के राज्य में प्रवेश किया तब परीक्षित कलियुग को मारने के लिए तैयार होगये । राजा को हाथमे तलवार लिए देख… Read More ›

राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषिके शाप की कथा

 द्वापर युग के अंत में भगवान श्री कृष्ण ने पृथ्वी पर अवतार धारण करके अधर्मी राजाओं के भार से पृथ्वी को मुक्त किया था  । जब भगवान श्रीकृष्ण  अपना अवतार कार्य समाप्त करके अपने धाम को चले गए तब पंडवोने… Read More ›

महाराज परीक्षितद्वारा कलीयुगका दमन

पांडवों के शरीर त्यागने के बाद अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित राजा हुए । परीक्षित बहुत ही धर्मात्मा और प्रजास्नेही थे । वे सदा ही ब्राह्मणो की सलाह के अनुसार राज्य का कार्यभार चलाते । एक समय उनको सूचना मिली कि… Read More ›

परीक्षितकी दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वीका संवाद

पांडवोंके अपने जीवन का त्याग करने के बाद उनके वंशज महाराज परीक्षित हस्तिनापुर साम्राज्य का शासन करने लगे । ब्राह्मणों की शिक्षा और सलाह के अनुसार परीक्षित अपना राज्य चलाया करते थे । उनके जन्म के समय ज्योतिषियों ने उनके… Read More ›

देवर्षी नारद के पूर्व जन्म की कथा ।

एक दिन की बात है महर्षि वेदव्यास प्रातःकाल उठकर स्नान आदि करके सरस्वती नदी के तट पर स्थित अपने आश्रम पर बैठे थे । उनोहनें महाभारत और देवताओं के पराक्रम और लीलाओं से पूर्ण अनेक पुराणों का निर्माण किया था… Read More ›

भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों का वर्णन

भगवान को जब सृष्टि करने की इच्छा उत्पन्न हुई तो उन्होंने अपने पुरुष रूप को प्रकट किया और कारण जल में शयन किया । उनके उसे  पुरुष रूप के नाभि से एक कमल उत्पन्न हुआ जिस में ब्रह्मा जी का… Read More ›